कृतज्ञता, स्मृतियाँ और जीवन का सफ़र: महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज, गोरखपुर की एक आत्मीय यात्रा
व्यक्ति को सदैव कृतज्ञ होना चाहिए—हर उस व्यक्ति, वस्तु और स्थान के प्रति जिसने उसके जीवन में थोड़ा सा भी बदलाव लाने की कोशिश की हो, चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। यही मानवीय गुण हमें सभी जीवों से विशिष्ट और श्रेष्ठ बनाता है, परंतु आज के समय में इस तरह का भाव लोगों में कम ही देखने को मिलता है।
अभी पिछले दिनों मुझे गोरखपुर जाने का अवसर मिला। वहाँ परीक्षाएँ चल रही थीं। वैसे तो मैं इसके पहले भी कई बार गोरखपुर गया हूँ, लेकिन इस बार का संदर्भ अत्यंत विशेष था। मेरा परीक्षा केंद्र मेरा अपना इंटरमीडिएट कॉलेज—'महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज' था, जहाँ से मैंने अपनी इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। वहाँ पहुँचने के बाद मैं एक अद्भुत भावुकता से अभिभूत हो गया कि कैसे हम लोग कभी इस कॉलेज में रोज़ आया।
करते थे! यही वह जगह थी, यही हमारा क्लासरूम था। दीवारों पर लगे छोटे-छोटे निर्देश और सुविचार (सूक्तियाँ), जो मुझे तब भी याद थे, आज भी पूरी तरह याद हैं; वे पट्टियाँ आज भी उसी तरह वहाँ लगी हुई हैं। वही बेंच, वही पुराना बैठने का सेटअप! देखा जाए तो हम कहीं भी हमेशा के लिए उपस्थित नहीं रह सकते। यह जीवन एक पूरी यात्रा है। हमने अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए इन सभी चीजों का थोड़े समय के लिए उपयोग किया। जब हमारा कार्य संपन्न हुआ, तो नए व्यक्तियों के लिए हमने रास्ता दे दिया कि 'अब तक इसका लाभ मैंने लिया, अब आप इसका लाभ लीजिए।' यही जीवन की सार्थकता भी है और यही इसकी सुंदरता भी।
इन सब चीज़ों को देखने के बाद हृदय में एक अतिरिक्त स्नेह का भाव उमड़ रहा था। कितना सुखद संयोग होता है जब पुनः उसी पुराने स्थान पर लौटने का अवसर मिले! हालांकि, समय के प्रवाह में लौटना तो एक छलावा है; लोग तो घर से निकलने के बाद चाहकर भी पूरी तरह वापस नहीं लौट पाते। लेकिन फिर भी, कुछ पलों का यह मिलना, स्मृतियों के साये में थोड़ी देर का यह विश्राम, जीवन को नई ऊर्जा प्रदान कर देता है, उसे पूर्णतः ऊर्जामय कर देता है। ऐसा अक्सर लोगों के जीवन में होता है कि वे जिस संस्थान से जुड़े होते हैं, जहाँ से उन्होंने अध्ययन किया है, या जब वे उस शिक्षक से मिलते हैं जिसने उनके जीवन को सफल बनाने के लिए अथक प्रयत्न किया, तो उनके प्रति एक गहरा भाव और लगाव हृदय में स्वतः ही भर जाता है।
हमारे छात्र जीवन के दौरान भी ऐसा सुनने में आता था कि महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय योगी जी का विशेष स्नेह रहा है। आज के कॉलेज में काफी परिवर्तन देखने को मिला। कुछ नए भवनों का निर्माण किया जा रहा है। जहाँ कभी पहले सुंदर फुलवारी होती थी अथवा जहाँ विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए साइकिल पार्किंग का स्टैंड था, वहाँ अब नए क्लासरूम बन गए हैं। शायद आज की नई ज़रूरतें ऐसी ही हैं, जिसके अनुसार ये सारे कार्य हो रहे हैं। यह बदलाव होना भी चाहिए, क्योंकि मेरा मानना है कि हमने भले ही जैसे भी उस दौर में पढ़ाई की हो, पर हम यही चाहेंगे कि जो भी नए लोग, नए बच्चे और नए विद्यार्थी यहाँ आ रहे हैं, उनके लिए बेहतर से बेहतर सुविधाएँ और अच्छे से अच्छा मार्गदर्शन मिले। इस कॉलेज के गौरवशाली इतिहास के साथ—बहुत ज़्यादा तो नहीं, थोड़ा सा ही सही—हमारा नाम भी जुड़ा है, और हम इसी गर्व से अत्यंत प्रसन्नचित्त हैं। वहाँ बिताए इन अनमोल क्षणों को सहेजने के लिए जहाँ तक संभव हो सका, मैंने कुछ तस्वीरें लेने का प्रयास किया।
इस विशाल कॉलेज के लिए मेरे जैसे हज़ारों-लाखों छात्र होंगे, पर मेरे लिए तो वह कॉलेज एक और अनूठा ही है। हमारे जैसे लाखों छात्रों का प्रेम और आदर इस संस्थान को अनवरत प्राप्त होता रहेगा। हाँ, मन में थोड़ा सा संकोच और कसक इस बात की भी रहती है कि जब आप सामाजिक नियमों या मानदंडों के अनुसार पूरी तरह सफल नहीं हो पाते, तो इस बात का खेद भी रहता है और दुख भी कि अगर आज हम कहीं किसी बड़े पद पर, किसी बड़ी जगह होते, तो यहाँ आने का भाग्य, सौभाग्य और आनंद कुछ और ही होता। परंतु ठीक है, जीवन का अपना एक संघर्ष है; यह संघर्ष कहाँ तक जाता है, कब तक जाता है, इसके बारे में सब कुछ सिर्फ एक पूर्वानुमान ही है। जिंदगी तो उनकी भी बीत जाती है जिनके पास सब कुछ है, और किसी तरह समय उनका भी कट जाता है जिनके पास कुछ भी नहीं है।
जीवन की तमाम परिस्थितियों और विषमताओं के बीच जब ऐसे भावुक क्षण आएँ, तो थोड़ा रुककर उन पलों से थोड़ी सी शांति और थोड़ा सा आनंद लेने का प्रयास अवश्य करना चाहिए। मन में सदैव कृतज्ञता का भाव रहे—हर उस व्यक्ति, वस्तु और स्थान के प्रति, जो आपके जीवन को थोड़ा भी परिवर्तित करने में सहायक सिद्ध हुए हों। और जहाँ तक संभव हो, हमें अपने जीवन की ऐसी स्मरणीय जगहों पर अवश्य जाना चाहिए।
© Pavan Kumar Yadav
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